मेरे गजल मेरी कवितायें

कहाँ जाऊं अब तुम्हारे बिना


तू रूह है ,
तू ही राह है ,
तेरे बिन ज़िन्दगी
स्याह है !!
तू कभी आये
कभी जाए
दिल के दालान में कभी यूँ ही,
दस्तक दे जाए !!
तेरा इस तरह से आना ,
दिल के इस खामोशी में
अनचाहा शोर मचाना
औरों को नहीं
पर मुझे भाता है !!
तेरे इस आने और जाने की जद्दोजहद में,
मै आज भी वहीँ रुका हूँ
जहां ,
तुम छोड़ के गए थे ,
आखिर कहाँ जाऊं ?
कैसे जाऊं ?
तुम्ही तो मेरे राहगीर थे ,
तुम्ही हमसफ़र
और हमकदम भी ,
ज़िंदगी का रास्ता मैंने नहीं देखा
कभी तुम्हारे बिना ,
अकेले चलना मैंने नहीं सीखा
कभी तुम्हारे बिना ,
अब तुम्ही बताओ
कहाँ जाऊं ?
कैसे जाऊं ?
अब तुम्हारे बिना

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साँसों  से क़र्ज़ लेकर तुझे प्यार कर रहा हूँ

तेरा इश्क कितना मुश्किल ये तूँ भला क्या जाने
कबसे संभल संभल कर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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तेरी राह कितनी मुश्किल ये मै ही जानता हूँ
पगडंडियों से चल कर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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कबसे टहल रही हो इस फुल जैसे दिल पर
कांटो पे टहल कर मै तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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कहती हो आओ मिल लो नज़रें उतार लुंगी
दिल में उतर कर मै तो तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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वादा है मेरा तुमसे कि प्यार सच्चा है ये
कितनो से झूठा बनकर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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उस दिन जो कह दिया बस की साथ ही जियेंगे
साँसों का क़र्ज़ लेकर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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कभी ज़िंदगी में आकर इस लाश को तो देखो
सौ बार मौत मरकर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!
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तुझे क्या पता है मेरे इस प्यार का फ़साना
खुद को ही खुद से खोकर तुझे प्यार कर रहा हूँ !!

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