- शिवानन्द द्विवेदी सहर
कुछ दिनों पहले भोपाल में अपनी रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आगामी लोकसभा चुनाव कांग्रेस की सीबाआई लड़ेगी ! नरेंद्र मोदी के इस कथन की प्रासंगिकता चारा घोटाले पर झारखंड की सीबीआई अदालत के ऐतिहासिक फैसले से काफी हद तक पुष्ट होती दिख रही है ! आखिरकार आज सत्रह साल बाद बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले के आरोपियों पर सीबीआई अदालत का फैसला आ ही गया ! अदालती फैसले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव एवं जगन्नाथ मिश्र सहित
44 आरोपियों को अदालत ने अलग-अलग धाराओं में दोषी करार दिया ,जिन्हें जल्द ही सजा भी सुना दी जायेगी ! आज के सत्रह साल पहले बिहार के सिंहभूमि जिले के पशु विभाग के दफ्तर में पड़े आयकर के छापों के बाद यह चारा घोटाला सबके सामने आया था और बाद में इस बात की पुष्टि भी हुई कि इस घोटाले में लगभग 9 अरब रुपयों का चुना सरकारी खजाने को लगाया गया है ! फिलहाल सीबीआई अदालत के इस फैसले को कई कोणों से समझने की जरुरत है क्योंकि यह पूर्णतया न्यायिक फैसला नहीं है बल्कि इस सजा के तमाम राजनितिक मायने भी हैं ! इस फैसले को लेकर बिहार की अंदरूनी राजनीति, आगामी लोकसभा चुनाव एवं राष्ट्रीय जनता दल के भविष्य के साथ-साथ कांग्रेस की सीबीआई नीति पर भी सवालों की सुई अटक रही है ! लालू पर आया यह फैसला अपने आप में कई पेंच कसता तो कई पेंच खोलता भी नजर आता है ! सबसे पहले गौर करने वाली बात ये होगी कि लालू यादव पहले बड़े नेता होंगे जो सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश पर सजायाफ्ता दागी होने के कारण अपनी संसद सदस्यता गवाएंगे ! अब बड़ा सवाल ये है कि यह फैसला लालू को किनारे करने की कांग्रेस की चाल तो नहीं है ? बिहार की हाल की राजनीति पर गौर करें तो राजग से अलग होने के बाद जनता दल यूनाइटेड के यूपीए से संबंधों में निकटता देखी जा रही है और सालों से विशेष राज्य के दर्जे पर चल रही रार को विराम देते हुए केन्द्र सरकार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा भी दिया है ! अब नितीश कुमार से कांग्रेस की बढ़ती निकटता के मायने यही हैं कि लोकसभा चुनावों के बाद अगर संख्याबल की जरुरत पड़ी तो बिहार में नितीश को यूपीए का हिस्सा बनाने में आसानी होगी ! इतना तो लगभग तय है कि चुनाव के पहले जदयू यूपीए का हिस्सा नहीं बनेगा और अकेले चुनाव लड़ेगी ! चुकि, बिहार के राजनितिक समीकरण में लालू यादव का माय समीकरण टूटने के बाद लालू की राजनितिक साख लागातार गिरती गयी और ना तो राज्य में और ना ही केन्द्र में ही उनका कोई महत्व शेष रह गया था ! वरना आपको याद हो तो नब्बे के दशक में जेल जाते-जाते लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना गए थे,मगर अब ना तो वैसी स्थिति है और ना ही वो प्रभाव ही बचा है ! हाँ, यूपीए और कांग्रेस द्वारा दरकिनार किये जाने के बावजूद भी लालू यादव कांग्रेस का लागातार समर्थन शायद इसी सीबीआई अदालत के फैसले से डर कर अबतक कर रहे थे ! फिलहाल लालू के जेल जाने के बाद बेशक पूर्व मुख्यमंत्री और लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने यह कहा है कि वो अपनी पार्टी अपने बेटे के साथ मिलकर चला लेंगी लेकिन राबड़ी और तेजस्वी यादव जनता के बीच लालू की तरह प्रभाव छोडने में कामयाब होंगे ऐसा कहना जल्दीबाजी होगी ! अपने नेता के जेल जाने से हतोत्साहित नितीश विरोधी वोटर अगर भाजपा का दामन थाम लिए तो यह नितीश की बजाय लालू के लिए बड़ी मुश्किल का सबब होगा ! आगामी लोकसभा में कांग्रेस बिहार में कुछ खास करती नहीं दिख रही इसीलिए उसने नितीश का सहारा लेने की सियासी चाल चली है ! अगर आगामी लोकसभा चुनाव में राजद की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और सीटों में इजाफा नहीं हुआ तो इसे राजद और लालू के अवसान के तौर पर देखा जाना चाहिए ! क्योंकि सीबीआई के पेंच में उलझा लालू का राजनीतिक भविष्य और भी उलझता ही जाएगा ! हाँ, अगर राजनीतिक उलटफेर हुआ और लालू फिर लोकसभा चुनाव 2009 की तरह 20 सीटे लाने में कामयाबी हासिल किये तो बहुत कुछ फिर से पटरी आते देर नहीं लगेगी ! लालू यादव राजनीति को वो खिलाड़ी हैं जो अपने रबर स्टैम्प मोहरों के लिए जाने जाते हैं ! अगर आगामी चुनाव में सबकुछ ठीक रहा तो खुद चुनाव ना लड़ पाने की स्थिति में भी वो समय रहते अपनी विरासत अपने पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को सौप देंगे ! इतना तो लगभग तय माना जाना चाहिए कि लालू और राजद का भविष्य फिलहाल आगामी लोकसभा चुनाव पर टिका है और आगामी लोकसभा चुनाव के बाद काफी हद तक यह स्पष्ट हो पायेगा कि लालू का और राजद का राजनितिक भविष्य क्या है ?
रही बात चारा घोटाले में न्याय पर तो निश्चित तौर पर लालू यादव सहित अन्य तमाम आरोपियों को दोषी करार दिये जाने के फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए ! यह देर से आया एक बेहतर फैसला है उस इसमें लालू यादव को तीन से सात साल तक की सजा भी हो सकती है ! लालू यादव की जेल पर बीजेपी ने एकतरफ स्वागत योग्य फैसला बताया है तो वहीँ जदयू सहित कांग्रेस भी ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं दिख रहीं ! हाँ, एकमात्र दिग्विजय सिंह ऐसे नेता हैं जो यह कह रहे हैं कि लालू यादव राजनीतिक खड्यंत्र के शिकार हुए हैं ! दरसअल, दिग्ग्विजय की बातों को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है ! वाकई लालू यादव का पर आया सीबीआई अदालत का यह फैसला पूर्ण रूप से न्यायिक नहीं है बल्कि इसमें व्यापक राजनीति हस्तक्षेप है ! अगर लालू यादव के साथ राजनीतिक हित साधने की बात नहीं होती तो संभवत: यह फैसला बहुत पहले आ गया होता अथवा अगर लालू यादव की लोकसभा में 20 सीटें होती तो संभवत: यह फैसला आज भी नहीं आया होता ! लिहाजा, यह मानने में कतई गुरेज नहीं होनी चाहिए कि लालू यादव पर यह फैसला कांग्रेस के सियासी समीकरणों को दुरुस्त करने की कवायद का हिस्सा है ! कांग्रेस लालू को निष्क्रिय कर अपना गठबंधन प्रबंधन कर रही है ! कांग्रेस यह तो चाहती थी कि लालू यादव जेल जायें और उन्हें दोषी करार दिया जाय, मगर ये नहीं चाहती थी कि लालू की सदस्यता भी जाए ! क्योंकि राजनीति में कोई पूर्णकालिक दोस्त नहीं होता और कोई पूर्णकालिक शत्रु नहीं होता ! फिलहाल ऐसे फैसले और भी आने की संभावना है ! यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि लालू का जेल जाना भी सीबीआई के कंधे पर बन्दुक रखकर कांग्रेस द्वारा लगाया गया एक राजनितिक निशाना है और मुलायम-मायावती पर चल रही आय से अधिक सम्पति का मामला सीबीआई द्वारा वापस लेना भी कांग्रेस का एक सियासी फैसला है !

bilkul sahi likha.. yeh sab siyasi faisla hai..
जवाब देंहटाएं