अभिव्यक्ति पर निगरानी : दैनिक जागरण नेशनल में यह लेख
राजनितिक कार्यों एवं आन्दोलनों में सोशल मीडिया के बढते प्रभाव एवं इसके सशक्तीकरण को भांपते हुए आखिरकार केन्द्र सरकार इसके प्रति गंभीर होती नजर आ रही है ! इस बात से कतई नाकारा नहीं जा सकता कि पिछले तीन-चार साल के इस कम समय में सोशल मीडिया आम जनमानस के अभिव्यक्ति का सबसे तेज और सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है ! जनमानस के अभिव्यक्ति के सबसे त्वरित मंच के रूप में उभरे सोशल मीडिया का प्रभाव पिछले दो सालों के आंदोलनो में केन्द्र सरकार देख भी चुकी है ! हालाकि शुरुआती दौर में तो केन्द्र एवं राज्य सरकारों द्वारा सोशल मीडिया को बहुत हल्के में लिया गया एवं कई बार तो इस आधुनिक मंच पर लगाम कसने की सीधी पहल तक की गयी ! ऐसा मौका कई बार आया जब केन्द्र सरकार की तरफ से इस बात की पहल की गयी कि फेसबुक,ट्विटर आदि जैसे नये मीडिया मंचों पर लगाम कसी जाय ! लेकिन अभिव्यक्ति पर अंकुश का मामला होने के कारण सरकार को खास सफलता मिलती नहीं दिखी ! हालाकि गाहे-बेगाहे ऐसा कई बार देखा गया है कि फेसबुक आदि पर लिखने अथवा टिप्पणी आदि करने के लिए लोगों को गिरफ्तार आदि किया गया हो ! उदाहरण के तौर पर हाल ही में दलित विचारधारा के साहित्यकार कँवल भारती कि गिरफ्तारी को देखा जा सकता है ! कँवल भारती की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि आज सोशल मीडिया हमारी सरकारों एवं प्रशासन को किस तरह से प्रभावित कर रही है ! सोशल मीडिया के प्रभावों को देखते हुए अब केन्द्र सरकार इस बात को समझ चुकी है कि इस मीडिया पर सीधा एवं पूरी तरह से लगाम लगाना कतई संभव नहीं है ! अत: केन्द्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया में अपनी पकड़ और निगरानी मजबूत करने के लिए एक नया रास्ता अख्तियार किया गया है ! सोशल मीडिया पर निगरानी एवं सरकार के प्रति सोशल मीडिया पर चल रही सक्रियता आदि पर सरकारी नजर रखने के अलावा अपने कार्यों को लोगों तक पहुचाने के लिए 22.5 करोंड़ रुपये के बजट वाले न्यू मीडिया विंग को मंजूरी दे दी है ! मूल तौर पर न्यू मीडिया विंग की जिम्मेदारी सोशल मीडिया के मंचों से सरकार के कार्यों को जनता तक पहुचाने के अलावा सरकार को लेकर आम जनता की सक्रियता पर नजर रखने की है ! न्यू मीडिया विंग की मंजूरी के बहाने केन्द्र सरकार अपने कई हित साधने की कोशिश करती नजर आ रही है ! इसे कहीं ना कहीं केन्द्र सरकार द्वारा आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए सोशल मीडिया के मंचों का उपयोग अपने प्रचार-प्रसार के लिए किये जाने की पहल के रूप में देखा जाना चाहिए ! अगर आपको याद हो तो कुछ ही महीने पहले सोशल मीडिया पर सक्रियता के नाम पर कांग्रेस की तरफ से लगभग सौ करोंड़ खर्चने की बात सामने आई थी ! यानी, एक बात साफ़ है कि सोशल मीडिया मंचों पर भाजपा से पिछडती कांग्रेस को यह बात समझ में आ चुकी है कि आगामी लोकसभा चुनाव को कमोबेश सोशल मीडिया जरुर प्रभावित करेगी ! एक आंकड़े के मुताबिक़ कुल 167 लोकसभा सीटों पर सोशल मीडिया की भूमिका निर्णायक होने के कयास लगाये लगाये जा रहे हैं ! ऐसे में न्यू मीडिया विंग की मंजूरी को लोकसभा चुनाव के लिहाज से एक चुनावी हथकंडे के तौर देखना कहीं से भी गलत नहीं प्रतीत हो रहा ! दूसरी तरफ इस बात को सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता कि न्यू मीडिया विंग की मंजूरी देकर सरकार अप्रत्यक्ष तौर पर सोशल मीडिया पर अपनी निगरानी का तंत्र बिठाना चाहती है ! सरकार के खिलाफ चल रही मुहिमो आदि पर नजर रखने आदि के लिहाज से यह विंग काम करता नजर आ सकता है ! सही मायनों में सोशल मीडिया के मामले में भाजपा से पिछडी कांग्रेस अब सरकारी स्तर पर पूरी तैयारी के साथ आती दिख रही है ! इस विंग के माध्यम से वर्तमान सत्तापक्ष द्वारा एक तीर से कई निशान साधने का काम किया जा रहा है ! अभिव्यक्ति पर लगाम कसने में विफल रही केन्द्र सरकार अब अभिव्यक्ति की आजादी में हस्तक्षेप करने का यह दूसरा रास्ता अख्तियार करती नजर आ रही है ! वाकई इस लिहाज से कहा जाना गलत नहीं होगा कि अब अभिव्यक्ति के इस नए माध्यम का इस्तेमाल दोतरफ़ा राजनितिक पैतरों की पैतरेबाजी के लिए भी होना तय है ! आगामी लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएगा इस न्यू मीडया विंग का प्रभाव दिखना भी शुरू हो जाएगा !
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