आज जब आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया वैश्वीकरण के एक नए आयाम की तलाश में आगे बढ़ रही है, तब हर राष्ट्र के लिए जरूरी हो जाता है कि वह दुनिया के बढ़ते कदमों के साथ कदम मिलाकर चले! आज पूरी दुनिया तकनीक के एक ऐसे प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रही है जहाँ हर राष्ट्र एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए अथक प्रयासरत है! एशियाई देशों में भारत और चीन दो ऐसे राष्ट्र हैं जिनमे सैन्य से लेकर हथियार एवं उद्योग से लेकर तकनीक तक की प्रतिस्पर्धा सालों से चली आ रही है! ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वो खुद को तकनीकी रूप से और मजबूत एवं परिपक्व बनाने के लिए प्रयाश करे! जैसा कि सर्वविदित है कि राष्ट्र के सार्वभौमिक विकास के लिए राष्ट्र की शिक्षा का स्तर एवं शिक्षा पद्धति का बहुत अधिक महत्व होता है! हमारी प्रगति की दिशा एवं दशा दोनों का निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपनी भावी पीढ़ी को किस स्तर की शिक्षा दे पा रहे हैं! शिक्षा के क्षेत्र में लिया गया कोइ भी गलत फैसला हमारे भावी राष्ट्र के निर्माण में घातक हो सकता है! आज जब कम्प्युटर कृत शिक्षा के साथ कम्प्युटर के क्षेत्र में तमाम विकल्प सामने आ रहे हैं, तो निश्चित तौर पर हमें ये सोचने कि जरूरत है कि इस दिशा में हम और हमारा राष्ट्र किस तरह का प्रयाश कर रहा है! कम्प्युटर के व्यापक इस्तेमाल ने इसे इक्कीसवी सदी के सबसे बड़े आविष्कार के रूप में स्थापित किया है! हर क्षेत्र में कम्प्युटर के बढ़ते प्रभाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट किया है और दुनिया के तमाम राष्ट्र कम्प्युटर के क्षेत्र में राष्ट्र कि तमाम संभावनाएं तलाशने में जुट गए हैं! आज जब भारत भी विकाशशील देशों कि प्रतिस्पर्धा में खुद को सबसे आगे साबित करने, खासकर चीन के साथ निकटतम प्रतिद्वान्धी के रूप में, में जुटा हुआ है तब ऐसी स्थिति में बड़ा सवाल यह उठता है कि तकनीक के क्षेत्र में हम जिस भविष्य की परिकल्पना कर रहे हैं क्या उसके लिए हम शैक्षिक स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं? वर्तमान आंकड़ों के आधार पर तो कम से कम यही कहा जा सकता है कि कम्प्युटर शिक्षा के मामले में हमारी स्थिति अपने निकटतम प्रतिद्वंधी चीन की अपेक्षा बहुत अच्छी नहीं है! आज भी चीन की कुल आबादी का लगभग तीस प्रतिशत हिस्सा कम्प्युटर का ज्ञान रखता है, जबकि भारत में यह आंकड़ा महज दस प्रतिशत के दायरे में सिमट कर रह गया है! यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि भारत में जिस त्वरित रफ़्तार से कम्प्युटर का प्रसार हुआ, उस रफ़्तार से हम कम्प्युटर की शिक्षा को नहीं बढ़ा पाए हैं! कम्प्युटर कृत विकास के लिए कम्प्युटर के प्रसार एवं कम्प्युटर की साक्षरता में संतुलन होना अनिवार्य है! कम्प्युटर के क्षेत्र में खुद को अग्रणी बनाने के लिए सरकार की तरफ से भी तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कम्प्युटर शिक्षा जैसे मुख्य मुद्दे को लेकर अभी कोई महत्त्वपूर्ण नीति तैयार करने में हम बहुत अधिक सफल नहीं हो पाए हैं! हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा कम्प्युटर के क्षेत्र में सस्ते दामों पर विद्यार्थियों को आकाश द्वारा निर्मित टेबलेट पीसी उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गयी! इस योजना के तहत तेरह सौ से तीन हज़ार तक में स्कूल, कोलेज के विद्यार्थीयों को टेबलेट देने का प्रावधान रखा गया, जिसका प्रथम चरण संभवतः पूरा भी हो चूका है! इस योजना से कम्प्युटर के प्रसार को लेकर हम भले ही आश्वस्त हों, लेकिन कम्प्युटर शिक्षा को इस योजना से कोई फायदा मिलने की संभावना ना के बराबर है! सरकार की इस योजना पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि कम्प्युटर महत्त्वपूर्ण है या कम्प्युटर की शिक्षा, जिस कम्प्युटर के बूते हम दुनिया के सामने अग्रणी होने का सपना सजाए हैं, उस कम्प्युटर की शिक्षा के प्रति हमारी नीति इतनी लचर क्यों है? सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कम्प्युटर शिक्षा के नाम पर हम क्या दे रहे हैं? क्या सरकारी विद्यालयों, खासकर ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों, में कम्प्युटर शिक्षा के लिए किस तरह की व्यव्बस्था की जा रही है? ये तमाम वो सवाल हैं जो कम्प्युटर के क्षेत्र में भारत के तमाम दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं! सच्चाई तो आज भी यही है की तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में कम्प्युटर जितना ही व्यापक है, शिक्षा के क्षेत्र में उतना ही शून्य! कम्प्युटर शिक्षा को लेकर हमारा तंत्र कितना गंभीर है, इसका प्रमाण इसीसे मिलता है कि आज तक ग्रामीण एवं जिला स्तर के इंटर मीडिएट कालेजों में कम्प्युटर एक विषय के रूप में उपलब्ध भी नहीं है! केंद्रीय बोर्ड को छोड़कर आप किसी भी राज्य के बोर्ड के छात्रों द्वारा नामांकन फार्म में चुने गए विषयों का अगर एक सर्वे करें तो आपको कुल विद्यार्थीयों का पांच प्रतिशत हिस्सा भी कक्म्प्यूतर शिक्षा के साथ दाखिला लिए नहीं मिलेगा! विभिन्न राज्यों में स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालयों से लेकर इंटर मीडिएट कालेज तक का अगर सर्वे किया जाय तो दश प्रतिशत विद्यालय भी ऐसे नहीं मिलेंगे जहाँ कम्प्युटर विषय उपलब्ध हो या कम्प्युटर के किसी शिक्षक की नियुक्ति हो! ऐसे हालात में हम कम्प्युटर के क्षेत्र में बहुत बड़ी कामयाबी किस आधार स्वीकार कर सकते हैं? कम्प्युटर और तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के मंच पर अगर हम इस प्रतिस्पर्धा में अग्रिम बनना चाहते हैं, तो प्रथम जरूरत यह है कि कम्प्युटर के प्रसार के साथ-साथ हम कम्प्युटर की शिक्षा का भी प्रसार करें! आज महत्त्वपूर्ण यह नहीं है कि भारत के हर घर में कम्प्युटर भेजा जाय, वरन अधिक महत्व इस बात पर दिया जाना चाहिए कि हर घर में कम्प्युटर शिक्षा को कैसे पहुँचाया जाय एवं कम्प्युटर शिक्षा के प्रति आम जागरूकता कैसे लायी जाय! टेबलेट एवं कम्प्युटर आदि को सस्ते दर पर उपलब्ध कराने से ज्यादा जरूरी है कि हम कम्प्युटर शिक्षा को सस्ते दर में गुणवत्ता के साथ प्रत्येक विद्यालय में उपलब्ध कराएं! कम्प्युटर शिक्षकों कि नियुक्ति भी अन्य विषयों के शिक्षकों क़ी नियुक्ति क़ी तरह ही कराने क़ी व्यवस्था क़ी जाय! सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि हमारा प्रयास इस दिशा में हो कि सरकारी विद्यालयों में अन्य विषयों क़ी तरह कम्प्युटर भी शिक्षा कि मुख्यधारा में शामिल हो! आज जब कम्प्युटर के प्रति समूची दुनिया में अगाध विश्वास क़ी भावना दिखाई जा रही है, ऐसे में कहीं ना कहीं हम कम्प्युटर के क्षेत्र में अपनी गलत नीतियों के कारण पिछड़ रहे हैं! आज कम्प्युटर क़ी दिशा में हम चीन से बहुत पीछे हैं, क्योंकि हम कम्प्युटर क़ी शिक्षा क़ी तरफ नहीं, बल्कि कम्प्युटर के विस्तारीकरण क़ी तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं! हमारी गलत नीतियों का ही परिणाम है कि कम्प्युटर सस्ते दामों पर उपलब्ध हो रहा है और कम्प्युटर की शिक्षा की कीमत आसमान छू रही है! बेहतर तकनिकी शिक्षा प्राप्त करना आज आम व्यक्ति के जेब के दायरे में नहीं आता, जबकि सही नीति में तकनिकी शिक्षा का सस्ता होना ज्यादा ज़रूरी है! अतः अब हमारी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी यह बनती है कि वो बजाय इसके की कंप्यूटर आदि को सस्ता करे, उसे तकनिकी शिक्षा को सस्ता करने के क्षेत्र में प्रयास करना चाहिए! कंप्यूटर आदि का प्रसार करके हम कंप्यूटर बढ़ा रहे हैं, कंप्यूटर की शिक्षा को नहीं! दुनिया में चल रही तकनिकी प्रतिस्पर्धा के लिए हमें कंप्यूटर को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने हेतु सजग होना ही पड़ेगा!
शिवानन्द द्विवेदी "सहर"
Saharkavi111@gmail.com
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