सरक्रीक भी देश की आंतरिक या वाह्य सुरक्षा से जुड़ा कोई मसला है इसके बारे में आम आदमी को शायद ही कुछ ज्यादा पता हो मगर हाल ही में नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को हथियार बनाकर जिस तरह से कांग्रेस घेरा है,कांग्रेस पीठ दिखाती नजर आ रही है ! इसमें कोई दो राय नहीं कि सियासत की बाजी में मुद्दा महत्वपूर्ण नहीं होता बल्कि उस मुद्दे को जनता के बीच पहुचाने और जनता से जोड़ने की कला महत्वपूर्ण होती है,और कम से कम इस कला में नरेंद्र मोदी माहिर खिलाड़ी हैं ! आज जब सरक्रीक खाड़ी जैसे ठंढे बस्ते में पड़े सीमा विवाद सहित अंतर्राष्ट्रीय एवं आंतरिक सुरक्षा के राष्ट्रीय मसले को नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस सरकार को घेरने का हथियार बनाया हो तो इसे महज गुजरात के आंतरिक राजनीति के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए,बेशक गुजरात में विधानसभा चुनाव चल रहे हों ! मोदी द्वारा इस मुद्दे के बहाने कांग्रेस सरकार को घेरने का कोई ऐसा मकसद नहीं नजर आता जिससे यह मान लिया जाय कि यह महज गुजरात चुनाव के दृष्टिकोण से भुनाया जा रहा मुद्दा है, भले ही इसका थोड़ा बहुत नफा नुकसान गुजरात चुनाव में भी देखने को मिल जाए ! वैसे भी गुजरात चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बिना लड़ाई लड़े ही हारे हुए सिपाही की तरह है जो सिर्फ पूरी शिद्दत से चुनावी औपचारिकाताओं में सहयोग कर लोकतांत्रिक पद्धतियों में में अपनी आस्था दिखा रही हो ! गुजरात चुनाव की सबसे खास बात यह है कि यह राज्य स्तरीय विधान सभा चुनाव होते हुए भी समूचे राष्ट्र के बुद्धिजीवियों एवं जनता के रूचि का विषय बन चुका है बावजूद इसके कि सबको लगभग यह भी पता है कि परिणाम किस करवट उबासियाँ लेगा ! सामान्यत: इन परिस्थितियों में चुनाव उदासीन रहते हैं लेकिन गुजरात इसमें अपवाद हैं ! सरक्रीक मुद्दे पर मोदी की सियासत को इसलिए भी महज गुजरात की सियासत से जोड़ कर देखना उचित नहीं लगता क्योंकि गुजरात में विपक्ष तो वैसे भी मुद्दों का अभाव झेल रही है ! धर्मनिरपेक्षता की सियासत करने वाली कांग्रेस द्वारा गोधरा प्रकरण तक को सशक्त मुद्दा नहीं बनाया जा सका है जिससे कि मोदी पर कुछ हद तक काबू पाया जा सका !
विधानसभा चुनावों का अगर चरित्र देखें तो सामान्यतया ये चुनाव क्षेत्रीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं चाहे यू.पी का जातिगत समीकरण हो या महाराष्ट्र का क्षेत्रवाद ! मगर यहाँ भी गुजरात अपवाद बनता जा रहा है, यहाँ विपक्ष द्वारा मोदी को घेरने का कोई पुख्ता मुद्दा नहीं मिल रहा तो दूसरी तरफ मोदी बिना चर्चा में रहे अपनी हैट्रिक लगाने को संतुष्ट नहीं दिख रहे ! बेशक आज नरेंद्र मोदी गुजरात चुनाव लड़ रहे हों लेकिन उनके निशाने पर केन्द्र के सियासत के महारथी ही रहे हैं जिनमे सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी का नाम प्रमुख है ! गुजरात कांग्रेस के कमजोर पड़ गए संगठन पर समय ना जाया कर सीधे केन्द्र सरकार और उसके प्रमुख नेताओं पर हमला करना यह बताता है कि नरेंद्र मोदी की नजर दिल्ली पर है गुजरात तो महज बहाना है !
इसी सियासी नजरिये और महत्वाकांक्षा को भुनाने के लिए आज नरेंद्र मोदी द्वारा सरक्रीक मसले को उठाया गया है जिससे सीधे तौर पर केन्द्र सरकार पर निशाना बनाया जा सके और देश की जनता के नजर में उनकी की छवि एक राष्ट्रीय सरोकारों वाले नेता की बन सके ! मोदी की सियासत के संदर्भ में अगर सरक्रीक विवाद को समझने का प्रयास करें पता चलता है कि यह सरक्रीक खाड़ी का काफी पुराना विवाद है जो गुजरात सीमा पर कच्छ से सटे ६५० वर्ग किलोमीटर का समुद्री इलाका है जिसपर पाकिस्तान एवं भारत दोनों देशो द्वारा अपने मालिकाना हक का दावा किया जाता रहा है ! सन १८४२ में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सिंध प्रांत पर कब्ज़ा किये जाने और उसे बंबई राज्य में शामिल करने के बाद यह हिस्सा बम्बई राज्य का हो गया जो कच्छ सीमा से सटे हुए गुजरता है जबकि दिल्ली पर शासन कर रही तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत इस सरक्रीक खाड़ी को भारत के नक़्शे में दिखाती रही ! आजादी के बाद सीमा विवाद का यहाँ मसला हीलाहवाली का ही शिकार रहा और इसी विवाद के चलते सीमा सटे मछुवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि अक्सर पाकिस्तानी मछुवारों को भारतीय सेना द्वारा पकड़ लिया जाता रहा है और भारतीय मछुआरों को पाकिस्तानी सेना द्वारा ! मामले को सलटाने के लिए भारत द्वारा खीचे गए सीमा रखे को पाकिस्तान ने मानने से इनकार कर दिया क्योंकि इस बंटवारे के तहत नब्बे प्रतिशत हिस्सा भारत की सीमा में आ रहा है और दस प्रतिशत पाकिस्तान के हिस्से में ! हालाकि अपुष्ट तौर पर ही सही मगर ऐसा भी अंदेशा जताया जाता रहा है कि सरक्रीक के इस ६५० वर्ग किलोमीटर में फैले इस हिस्से पर भारी मात्रा में गैस का भण्डार मिलने की संभावना है !
सरक्रीक विवाद के मसले को सुलझाने के लिए प्रधानमत्री के तरफ से पहल किये जाने की सुचना के बाद बेशक भाजपा के किसी केन्द्रीय नेता ने मामले को सियासी मुद्दे में बदलने की चतुराई नहीं दिखाई लेकिन गुजरात से दिल्ली की राह ताक रहे नरेंद्र मोदी को इसमे प्रधानमंत्री और कांग्रेस सरकार को घेरने का एक सियासी हथियार मिल गया ! सरक्रीक मसले पर नरेंद्र मोदी ने जहाँ सरकार को यह कह कर बैकफुट पर ला दिया कि यह जलीय हिस्सा भारत का है और इस हिस्से में आने वाले तमाम प्राकृतिक संसाधनों पर भारत का ही अधिकार है, अत: सरकार द्वारा अगर १०% से ज्यादा हिस्सा पाकिस्तान को दिया जाता है तो इससे ना सिर्फ कच्छ बल्कि पुरे देश की आंतरिक सुरक्षा एवं आर्थिक व्यवस्था को भारी खतरा उत्पन्न होगा ! देश की आंतरिक सुरक्षा एवं आर्थिक व्यवस्था से जुड़े ठंढे बस्ते में धुल फांक रहे इस मसले को मोदी ने जिस तरह से हथिया लिया है इससे भाजपा के ही कई केन्द्रीय चेहरे मन ही मन ठगा हुआ महसुस कर रहे होंगे ! मोदी द्वारा केन्द्र सरकार को बात बात पर घेरे जाने को इस नजरिये से भी देखा जाना चाहिए कि मोदी यहाँ सिर्फ सरकार को ही घेर नही रहे बल्कि अपनी पार्टी में भी अपना कद ऊँचा करने की कोशिशें तेज कर रहे हैं ! मोदी को यह बखूबी पता है कि मिशन २०१४ के लिए अगर मोदी का नाम आता है तो इसे भाजपा में बिना किसी विरोध के स्वीकार कर लिया जाएगा,ऐसा नामुमकिन ही है ! ऐसे में नरेंद्र मोदी खुद को गुजरात की सियासत तक सीमित ना रख कर केन्द्र की सियासत में दाव आजमा रहे हैं ताकि वो देश के राष्ट्रीय नेता के रूप में उभर कर आ सके !
चाहे सरक्रीक का सीमा विवाद मसला हो या सोनिया गाँधी के विदेश यात्रा पर खर्च का मसला, हर मसले पर मोदी के निशाने पर केन्द्र की सरकार रही है ! गुजरात को लेकर निष्फिक्र मोदी गुजरात के बहाने लोकसभा के लिए अपनी बुनियाद मजबूत करने की तैयारियां करते नजर आ रहे हैं !गुजरात से बेफिक्र केन्द्र पर नजर गड़ाए सियासत का तापमान माप रहे नरेंद्र मोदी को मिली इस खुली छूट की वजह यह कतई नहीं है कि वो विकास पुरुष का चेहरा रखते हैं ! बल्कि इसके पीछे की मुख्य वजह ये है कि गुजरात में कांग्रेस ना तो संगठन स्तर पा ना ही मुद्दे के स्तर पर ही मोदी का विकल्प प्रस्तुत कर पाई है जिससे कि मोदी को गुजरात की सियासत तक समेट कर रखा जा सके ! मोदी को मिली इस खुली छूट की वजह यह भी है कि भाजपा के पास भी मोदी से ज्यादा संघ का विश्वस्त कोई नेता नहीं बचा है जिसके अंदर सफलता की संभावना तलाशी जाय ! बेशक आज भी बहुत सारे बड़े चेहरे हों भाजपा में देखने को मिल जाए लेकिन अटल-आडवाणी की जोड़ी के अलावा कोई एक चेहरा नहीं जिसके वजह से भाजपा के सफलता का कोई राष्ट्रीय इतिहास नजर आता हो ! कांग्रेस की गुजरात में कमजोरी औए भाजपा में सफल चेहरों की कमी ने नरेंद्र मोदी को देश की राष्ट्रीय राजनीति में बिन बुलाये हस्तक्षेप करने की अनुमति दे दी है और नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय सियासत की नब्ज को पहचानने में कोई मौका नहीं छोड़ रहे चाहे वो सरक्रीक का मसला हो या कोई और ..!!
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